सोमवार, 27 दिसंबर 2010

पुलिस


पुलिस अलबादी छोरो |
जके गे हाथ में डंडियों पाँच पोरो |
कानी- कानी जेबां, महं माल नावड़े बोरो |
जनता बोरडी गो पेड़,
ओ जद चढ़ ज्य बीं छोरे गे गेड़,
तो जित्ता डंडिया पड़े,
बित्ता ई बोरिया झड़े|

रविवार, 19 दिसंबर 2010

सीख


बरसना है तो रामजी ढंग स्यूं बरसो,
गाजण-गूजण में के पड़यो है |
पति न परमेशर मानो ए पत्नियों,
साजण-सूजण में के पड़यो है |
घरूं पढ़ण जान्ती छोरियां न इत्तो ई कहंनो है ,
थे दौड़ लगाण सीख ल्यो,
भाजण-भूजण में के पड़यो है

शनिवार, 18 दिसंबर 2010

दिल की बात


जुबां जब चुप रहती है,
निगाह बात करती है |
तेरी झुकी हुई निगाह भी,
खुबसूरत फ़साना है |
वो उंगली पर लपेटना दुपट्टा,
पांव के अंगूठे से धरती पर
कुछ लिखना और मिटाना,
रुक-रुक के चलना ,
फिर पलट के देखना,
शरमा के भाग जाना ,
और छत पर आ जाना
तस्लीम-ए-मुहब्बत का
दिलकश बहाना है |

गुरुवार, 4 नवंबर 2010

लो भाई दीवाली आई
















रोशनियों के रथ पर चढकर,
उमंगों के वसनों में सजकर,
मंगलमयी संदेशा लाई।
लो भाई दीवाली....।
पकी बाजरी मचले मोठ,
बना मतीरा गोरी के होंठ,
रूई के खेत में चांदी छाई।
लो भाई दीवाली....
कोट स्वेटर का हुआ स्वागत,
गुड़ गज्जक की हो गई आगत,
छुप गये शर्बत, बर्फ, ठण्डाई।
लो भाई दीवाली....
दे गई ठंड गुलाबी आहट।
सूरज से छिन गयी गर्माहट
अच्छी लगने लगी रजाई।
लो भाई दीवाली....
मच्छर मक्खी से पिण्ड छुड़ाये,
दिन रातों में पढने के आये,
रामलीला को मिली बिदाई।
लो भाई दीवाली.....।
घर, आंगन और सजी दुकान
ललचाने लगे हैं अब पकवान,
रंग-रोगन आई हुई पुताई।
लो भाई दीवाली......।
दीपावली का जगमग आलोक,
मिटे क्लेश दु:ख और शोक,
भेदभाव की सिकुड़ी खाई।
लो भाई दीवाली आई.....।

फुलझड़ी


पटाखों की दुकान पर
मुन्ना बोला - मम्मी!
फुलझड़ी मत लेना,
पड़ोस में
बहुत पड़ी है।
कल पापा पड़ोसन आंटी से
प्यार करते हुए
कह रहे थे
तू तो मेरी जान
खुद फुलझड़ी है॥
तब मम्मी बोली -
डोंट वरी, मैंने,
सब हिसाब
बराबर किये हैं।
पटाखों वाले अंकल को
पैसे कहां दिये हैं।

शनिवार, 30 अक्तूबर 2010

अजब-गजब धोरां री काया-माया

आपणी भाषा-आपणी बात
तारीख
-१८//२००९

अजब-गजब धोरां री काया-माया


रूपसिहं राजपुरी रो जलम 15 अगस्त, 1954 नै संगरिया तहसील रै गांव मोरजंडा सिक्खांन में होयो। राजस्थानी में साहित रचणवाळा देस रा पै'ला सरदार। देस-विदेस में हास्य-कवि रै रूप मांय चावो नाम। सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड अर हांगकांग रै मंचां पर राजस्थानी कविता पाठ। आधा दरजन पोथ्यां रा लिखारा। शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक। रावतसर में बसै। राजस्थानी मान्यता आंदोलन सूं सरू सूं ई जु़डाव। दूरदर्शन अर रेडियो सूं प्रसारण।

-रूपसिहं राजपुरी
कानाबती- 9928273519

राजस्थानी धरती री पिछाण आन-बान खातर पिराण लुटावणियां रण-जोधां सूं है, जकां रा नाम चेतै करतां ई काळजै में करण-करण, बूकियां में सरण-सरण अर मूंछ्यां में फरण-फरण होवण लागज्यै। अठै इस्या-इस्या बीर हुया, जका सिर कट ज्याण पछै भी बैरयां रा सिर कड़बी-सा काट-काट छांग लगांवता। जोर पिताण अर हथियारां रो काट उतारण सारू लड़ाई मोल ले लेंवता। उधारी लेवण सूं भी को चूकता नीं। जद ई तो कैयो है-

केसर नंह निपजै अठै, नंह हीरा निपजंत।
सिर कटियां खग सांभणा, इण धरती उपजंत।।

ईं धरती री पिछाण एक और चीज सारू भी है, बा है, ईं रा धोरा। जिकां नै टीबड़िया भी कैवै। धड़ा भी कैवै। दूर-दूर तांणी रेत रो समंदर। आंधी, बोळी-काळी आंधियां अठै सूं ई उपजती अर अठै ई खत्म हो जांवती। भरमां-बहमां रा बाप भंभूळिया भी अठै ई जलमता। रात ई रात में चै'न चक्कर बदळ जांवतो। नक्सो पळट जांवतो। मोटोड़ो धोरो गावं री आथूणी कूंट होंवतो पण दिनूगी नै अगूण दीसतो।
आं धोरां सागै ई जु़ड्यो है अठै रै रैवासियां रो जीणो-मरणो। टाबर गुडाळियां चालणो पैलपोत रेत पर ई सीखै। पक्कै फरस पर सौ जोखम। पण रेत मां री गोद-सी सुखाळी-रूपाळी। ठुमक-ठुमक, रूणझुण बजांवतो टाबर कोडां-कोडां मे ई चालणो सीख जावै। मोटा होवण रै पछै रेत सूं हेत बधै। जेबां-झोळ्यां भर-भर खेलै। साथी-संगळियां पर उछाळै। किलोळ करै। थोड़ा और मोटा होय'र डांगर-ढोर चराण जावै तो आं टीबां में सरण मिलै। धोरां री ओट भांत-भांत रा खेल खेलै। कुरां-डंडो, आंधो-झोटो, सक्कर-भिज्जी, लूणिया-घाटी, लाला-लिगतर अर मुरचा-पिछाण।
कित्ता ई चिड़ी-जिनावर टीबां रै आसरै दिन कटी करै। हेरण, रोझ, गोडावण, चीतल, सांभर, गादड़, लूंकड़, रो'ई-बिल्ला, सेह, गोह, नेवळिया, गोईरा, सुसिया, परड़, बिच्छू, ऊंदर, टीटण, कसारी, किरड़कांटी, भूंड-भूंडियो अर बू़ढी-माई बरणा अलेखूं जीव-जिनावर धोरां सूं हेत को तोड़ सकै नीं। तीतर, बुटबड़, गिरझ, चील, घग्घू, सिकरा, बाज, कोचरी अर कागडोड टीबां सूं दूर कठै! बणराय मतलब वनस्पति रा तो ऐ धोरा खैंण। डचाब, बूर, भुरट, सींवण, खींप, सिणियो, बूई, बोझा, झाड़की, रोहिड़ा, खेजड़ी, इरणां, जाळ, सरकणां, फोग, रींगणी, धतूरा, आक, आसकंद, मूसळी, कुरंड, मोथियो, और कठै लाधै!
छोरी नै परणावण सारू हाथ पीळा करण री कैबा ना चाल'र धोरियै ढळावण री कैबा चालै। घणा ई धोरा आपरै नाम सूं औळखीजै। लाखा धोरा, टेसीटोरी धोरा, समराथळ धोरा, रत्ता टीबा। सूरतगढ़ रै आ'र-बा'र रो सैकड़ूं मील रो ऐरियो टीबा खेतर रै नांव सूं जाणीजै। सदियां सूं टीबा गांव-गुवाड़ रा साखी अर संस्कृति रा रथवान। जद तक दुनिया रै'सी। टीबां री बातां रैसी। फिलमां आळा अर विदेशी सैलाणी टीबां कानी भाज्या आवै तो कोई तो कारण होसी!

आज रो औखांणो

धोरा किण री कांण राखै, चढ़तां दौरा तो उतरतां सौरा।

टीले किसी का लिहाज नहीं रखते, चढ़ते हुए कठिन तो उतरते हुए आसान।

चाहे अमीर चढ़े या गरीब, चाहे राजा चढ़े या रंक दोनों के लिए चढ़ना मुश्किल और उतरना आसान।

शुक्रवार, 29 अक्तूबर 2010

SPEECH DETE HUYE


IN FARM

SP SAWAI SINGH GODARA KE SATH

TEHSILDAR VIRENDER SINGH DUDDI KE SATH

SHIV RAJ BHARTIYA KE SATH

SHASHI DATTA KE SATH

KAVI SAMMELAN RAWATSAR ME KAVITA PATH KARTE HUYE

RANI LAXMI KUMARI CHUNDAWAT KE SATH

NAGAR KIRTAN RAWATSAR


SCOUTING ME ROOP SINGH RAJPURI





रविवार, 19 सितंबर 2010

बापड़ा रूख


टांग टूटै घोड़ै नै,
मरवा दियो जावै।
सूख चुकै फूलां नै,
जलवा दियो जावै।
एकली छीयां खातर,
कुण लगावै रूंखां नै।
जका फल नीं देवै,
बानै कटवा दियो जावै।

सोच लेईयो


मन्दिर-मस्जिद आस्था है,
आस्था रो कोई भवन नी हुवै।
हिन्दु-मुस्लिम भाई-भाई हैं,
आस्तीन रै सांप सो कोई दुश्मन नी हुवै।
जलती आग मैं घी गेरो तो, थोड़ो सोच लेईयो,
हर बार ओ काम हवन नीं हुवै।

शिकार

बेटा-बेटी मैं फर्क करैं जका,
समझ ल्यो बां रो राम निसरग्यो।
ऊत, कपूत घणां ई जामयां,
घर-घर मैं आंगणियों भरग्यो।
इन्दिरा जेड़ी एक ना जामी,
देखो कित्ताा अरसा गुजरग्यो।
बै जामैं तो कीयां जामैं,
अल्ट्रासाऊण्ड बां रो शिकार करग्यो।

बै सम्भल्या नीं करैं

रिसतां गी सड़क पर,
शर्त गा पहिया, चल्यां नी करैं।
दोस्ती गे पेट मैं,
लालच गा टाबर पल्यां नीं करैं।
पग तिसल्यो तो,
उठ'र फेरूं चाल लेस्यां।
जकांगी नीत तिसली,
बै सम्भल्या नीं करैं।

पटाईलोजी

रमकूड़ी जवान बणगी,
बाल कर'र डाई।
बोबी कट स्टाइल राखै,
घरै आवै नाई।
पटाईलोजी करैं छोरा।
मानै कोनी चेड़ भोरा।
भाभी बीनै कैण लागग्या,
जका कैंता ताई।

पाडो


पक्को राग गाण लागयो,
कब्बाल जी बाडो।
खूब लम्बी हेक काडी,
जोर लगायो डाडो।
रामूड़ै गी दादी,
बोली, बस कर लाडी।
काल ईंयां ई अरड़ायो हो,
अर मर गयो म्हारो पाडो।

भाव-ताव


सब्जी मण्डी मैं,
ईयां ई बूझ बैठयो,
टमाटरां रो मोल,
सेठ बोल्यो - ताजा, बढिया पांच रीपिया,
सड़या, गळया अर बासी,
दस रीपिया किलो गा तोल।
मैं कैयो - अै सड़या टमाटर,
कठै जावैंगा?
बो बोल्यो,
आज म्हारै शहर मैं,
कवि सम्मेलन है,
अै बठै काम आवैंगा।

अलबादी छोरो


कलास मैं अलबाद करी,
छोरै अलबादी।
बैंच पर खड़यो होजा,
गुरूजी आज्ञा सुणादी।
छोरै तो झट रोणो सो,
मूंह बणा लियो।
बोल्यो खड़यो कीयां होऊं गुरूजी,
मेरो तो टूटयो पड़यो नाळियो।
हरामजादे अभी तेरे,
बाप को बुलाता हूं।
हैडजी नै कहके,
तेरा टी.सी. कटाता हूं।
बाबो तो घरूं बाहर,
आ ई कोनी सकैं,
इसो पक्को इंतजाम,
करके आयो हूं।
ओ नाळियो मैं बांगै ई,
पजामै मूं काढ गै ल्यायो हूं।

हम आपके हैं कौन?


छोरो मन्नै बोल्यो मैं,
बणू सलमान खान।
सागै पढती छोरियां स्यूं,
इश्क लड़ाऊंगो।
आधी रात कार भी चलाऊंगो,
शराब पी'र,
सूतै पड़ै लोगां पर,
फेर बो चढाऊंगो।
कालिये मिरग गो शिकार,
करूं भाज-भाज,
इत्तौ काम खातर मैं,
जोधपुर जाऊंगो।
मैं कैयो तन्नै कठै,
जाणगी नी लोड़ बेटा,
'हम आपके हैं कौन?'
तन्नै घर मैं ही बताऊंगो।
अब ताईं रह्यो तेरो बाप बण सुन बेटा,
अमरीशपुरी तन्नै अब बणगै दिखाऊंगो।

दुरगती


आजकाल सड़कां गी,
बड़ी है दुरगती।
आं पर चाल ज्यै,
कोई लुगाई गर्भवती।
तो असपताल जाण गी,
बीनै कोनी जरूरत।
बीच सड़क मैं,
होज्या बच्चै रो मुहूर्त।

डायरी


पति-पत्नी मैं रह्या,
करतो मन मुटाव।
दफ्तर स्यूं आ'र पति,
खोल'र बैठ जांतो किताब।
पत्नी कानी बो,
आंख बी नीं उठांतो।
ओई काम पत्नी नैं,
कोनी सुहांतो।
एक दिन बोली,
हे भगवान तू मन्नै,
लुगाई नीं किताब घड़तो।
फेर कदै तो मेरो पति मन्नैं पढ़तो।
पति भी बोल्यो,
हे भगवान तूं ईन्नैं,
किताब नी डायरी बणांतो।
जद भी नयो साल लागतो
मैं नुंईं लेगै आंतो।

अंग्रेजी टयूसण

घर आली एक दिन,
जद घरां आई हांड।
बोली, अंगरेजी पढस्यूं,
पढासी मैडम टांड।
दो चार दिन चाल्यो टयूसण।
फैल गयो संस्कृतियां गो प्रदूसण।
दोन्यूं हो गयी चूंडम-चूण्डा।
गंदी गाळ काढै बोलै भूण्डा।
टयूसण गै असर,
तो कर दीयो कांड।
आ बीनै कैवै 'बल्लडी फूल',
बा ईनै कैवै कुत्ती रांड।

स्टैण्डर्ड

भगवान मन्नै बोल्या,
''ओ माई डीयर सन''।
मैं तन्नै छप्पर फाड़'र,
दे स्यूं धन।
तो पैलो काम के करसी 'डीयर',
मैं कैयो सर छप्पर गी 'रिपेयर'।
बै बोल्या - अरै कदी तो,
गरीबी रेखा स्यूं ऊपर आया कर।
ख्याली पुलाव अर
मन गा लाडू खाया कर।
मैं कैयो भगवान,
थे गरीबां गा मन, ललचाया ना करो।
अकूरड़ी पर सोण आला नै,
शीश-महल रा सपना दिखाया ना करो।
मैं तो थारे कन्नूं,
छप्पर जित्ती ही आस करो हो।
थे भी तो आदमी गो 'स्टैण्डर्ड' देख'र ही,
बजट पास करो हो।

घड़ी अर घर आली


रामू बोल्यो, श्यामू बता,
घड़ी अर घर आली मैं कितो फर्क है।
श्यामू बोल्यो, ईं बात मैं ओई तर्क है,
घड़ी बिगड़ज्या, तो घर मैं ना खोल।
अर घर आली बिगड़ज्या
तो बींगै सामै ना बोल।

भक्ति भाव


आजकाल
भक्ति भाव मैं
'परमारथ',
इत्तो आ गयो।
ओ भेड़चाल सो
फैशन,
सब जगा छा गयो।
ईंगो कोई भी मौको,
लोग खोण कोनी देवैं।
जणाईं तो 'जुम्मे-जागरण' मैं
स्पीकर लगा'र,
गांव भर नैं सोण कोनीं देवैं।

पति - पत्नी


पति-पत्नी गै बीच मैं,
एकर बहस छिड़ी बड़ी सोणी।
पत्नी बोली- इसो कोई विभाग बताओ,
जकै मैं लुगाई कोनी।
राजनीति, धर्म, थानेदारी, गुण्डागर्दी,
म्हे तो सब जगा बढ़गी हां।
ओर तो ओर म्है तो,
चांद पर भी चढगी हां।
पति गै बात अड़गी,
पण झट बण काढी।
बोल्यो, दमकल विभाग मैं,
थे एक भी कोणी लाडी।
खिसियांती सी पत्नी बोली,
बो तो म्हे जाणगै छोड़यो है,
थे आ बात जाणो कोणी,
म्हारो काम आग लगाणो है, बुझाणो कोनी।

जहाजण


म्हारी धर्मपत्नी नै हवाई जहाज मैं,
चढणै गो मिल्यो पैली बारी चांस।
बण सुण राख्यो हो, कि ऊपरूं देख्यां,
कीड़ीयां बरगा दीसै, नीचला मानस।
चढतां ही बोली, देखो रै देखो,
कीड़ीयां बरगा दीसैं
बापड़ा नीचला लोग-लुगाई।
एयर होस्टेस हंस'र बोली,
अै वास्तव मैं ईं कीड़ीयां हैं,
अजे जहाज,
उड्डयो कोनी ताई।

ईनै के कहस्यां

म्हारा एक गुरूजी,
बड़ा ही महान है।
आजकाल 'अन्न बचाओ',
अभियान कानी ज्यादा ही ध्यान है।
हफतै मैं तीन-चार दिन,
बरत करैं।
बीं दिन बिचारा बरफी, दूध
अर केला स्यूं ही,
आपगौ पेट भरैं।

नेक काम

आजकाल इश्क पर,
अर्थ कित्तो हावी है।
आजकाल गी महबूबा,
कित्ती दुनियावी है।
एक उदाहरण देखियो विचार गै।
प्रेमी बोल्यो - तेरे प्यार में मरूं हूं।
अपणै जीवण गो अन्त करूं हूं।
कुएं मैं छलांग मार गै।
माशूका बोली- मरै है तो मर,
एक नेक काम तो कर।
अब्बा गे काम आजैगो,
ओ लंगोट तो देजा उतार गै।

दो रीपीया मैं


अफसर बड़ो ही,
उसूल पसंद।
रिश्वत लेण गो,
न्यारो ई ढंग।
जित्ती तारीख,
बित्ता ही रीपीया लेवै।
फेर अगलै गो,
काम कर'र देवै।
गणतन्त्र दिवस पर,
छब्बीस लेंतो।
शहीद दिवस पर,
तीस लैस्यूं कैंतो।
लोग भी खूब नहले पर,
दहला टिकावंता।
घणकरा सा काम,
गांधी-जयन्ती आळै दिन ही करांवता।

पुर्जो


बी.ए. गी परीक्षा मैं,
एक छोरी नकल गी परची ले'र आई।
एग्जामिनरां री नजर स्यूं,
बा बच कोनी पाई।
बुढो प्रोफेसर बोल्यो- नारी वर्ग भी अब,
मर्दां स्यूं आगी जाण लागरिया है।
जवान प्रोफेसर बोल्यो- जणां ई तो,
आजकल पुर्जा भी पुर्जा ल्याण लागरिया है।

कंजूस

सेठ करोड़ीमल हो,
जबरो ही कंजूस।
चा मैं पड़ती माखली,
बीनैं लेंतो चूस।
दमड़ी खातर बोकतो,
छोरी नै नित टोकतो।
कि जद एक स्यूं सरै,
तो तूं दो चोटी क्यूं करै?

फारजैंट छोरी


छोरै खातर छोरी देखण गया,
छोरी फारजैंट।
छोरो बिचारो गोबर गणेश,
मांग'र पैरी पैंट।
छोरी बोली- बन्ना जी,
कोई बात तो बताओ।
अर आ समोसा खाणै मैं,
मेरा साथ तो निभाओ।
छोरो बुंदलाइज्गयो,
अर कढ्ढी ढोल दिखाई।
बोल्यो- हैं भैण जी,
थे कित्ता हो भैण-भाई?
छोरी माथै पर हाथ मारया,
कि तेरा तो बेड़ा पार हो गया।
अब तांई तीन हा,
अब तन्नै मिलागै चार हो गया।

फब्बारा सिस्टम


जद स्यूं चाल्यो है,
खेतां मैं फब्बारा सिस्टम।
कई किसानां गी,
किस्मत जाग गी।
बूंद-बूंद स्यूं तो घड़ो ई नीं भरतो,
अब भखारी भरण लागगी।
टयूबवैल पर 'फागण' गावै,
ट्राली भर मण्डी नै जावै।
जकै नै चा पीण गी भी,
आदत नीं होंती।
दारू पीण गी बीनैं,
बाण लाग गी।

चोट

नकली नोट छापणियां,
खुद ही खागयो चोट।
जल्दबाजी मैं छाप बैठयो,
साठ-साठ गा नोट।
साठ गा नोट बाजारां मैं तो,
जिन्दगी भर नीं चालैगा।
भोला-पंछी गांव-निवासी,
ईं झांसै मैं आलैगा।
बड़ी उम्मीदां ले'र बाबू,
एक गांव मैं आवै।
एक देहाती कन्नूं बा,
नोट खुल्लो करवावै।
साठ गो नोट देख देहाती मुळक्यो,
कि आछी आई ताबै।
तीस-तीस गा नोट आकरा,
मैं भी फिरूं हूं कद गा दाबै।

शनिवार, 18 सितंबर 2010

औलाद

तेज रफ्तार औलाद सामी,
माइत ईयां लागै।
जीयां कबाड़ होयो रेडियो,
रंगीन टी.वी. आगै।
छोरो विज्ञानी गी पूंछ,
राखै कोनी मूंछ।
सारी-सारी रात लेबोरेट्री मै जागै।
कैवे, आजकल तैयार करूं बाप गो क्लोन,
सूणी सी माऊ भी, घड़ लेस्यूं सागै।

सेब आला बाबा


सेब आला बाबा

म्हारै एक भैंस है,
बीस साल होग्या, कदे बयाई कोनी।
अस्पताल गई कोनी,
नसबन्दी करवाई कोनी।
ईं खातर म्हारी गली मैं,
कदे झोटै गी दीसी, परछाई कोनी।
अर बींगै हाई करेक्टर पर,
आजतक आंच आई कोनी।
अब म्है पछतावां,
कि ईन्नै पाडां आला नैं ईं पकड़ावां।
फेर सोचां के इत्ती छोटी सी,
बात भी आपणी समझ मैं आई कोनी।
ईनैं सेब आलै बाबै कन्नू,
दवाई दिरा'र पसू मेलै मैं सरकाई कोनी।

सोमवार, 30 अगस्त 2010

मंगलवार, 22 जून 2010

ईलाज

पैली जद टाबरां नै
नींद कोनी आंमती ,
दादी या नानी
बानै कहानी सुनामती !
सोणे थकां दादी बच्चां नै
आज भी बुलावै है
कोई कहानी कवो टाबरो
मन्नै नींद कोनी आवै है,
टाबर तो सीरियल देखें
कहानियां कद जाणे
पण दादी गी बीमारी बै
चोखी तरयाँ पिछाने
मायतां सारुं फरज नै
बै अं तरियां निभावें
नींद गी गोली घोलगे
बै दादी ने पियांवें !

सोच लेइयो

मंदिर - मस्जिद आस्था है ,
आस्था रो कोई भवन नीं हुवै !
हिन्दू - मुस्लिम भाई -भाई हैं,
आस्तीन रे सांप सो कोई दुश्मन नीं हुवै !
जलती आग मैं घी गेरो तो , थोड़ो सोच लेइयो ,
हर बार ओ काम हवन नीं हुवै !